इस बार जन्माष्टमी को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की निशीथाव्यापिनी अष्टमी तिथि तथा रोहणी नक्षत्र दोनों नहीं मिल रहे हैं I धर्मसिन्धु में कहा गया है कि ‘भाद्रपद कृष्ण अष्टमी निशीथाव्यापिनी ग्राह्यI ’' यदि तिथि निशीथव्यापिनी अष्टमी नहीं मिल रही हो तो ऐसी दशा में फिर धर्मसिन्धुकार ने कहा है कि ‘दिन द्वै निशिथव्यापत्य भावे परयवाअष्टमी ग्राह्याI " अर्थात यदि दो दिन अष्टमी तिथि मिल रही हो तो दूसरे दिन भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाना चाहिए I भाद्र कृष्ण अष्टमी 15 अगस्त की अर्धरात्रि के बाद 12 बजकर 58 मिनट पर लगेगीI जो 16 अगस्त को मध्य रात्रि के पूर्व 10 बजकर 29 मिनट तक रहेगीI इसलिए मध्यरात्रि में न मिलने पर उदयातिथि की अष्टमी को जन्माष्टमी 16 अगस्त को मनाई जाएगीI वहीं, रोहिणी मतावलंबी वैष्णवजनों का श्रीकृष्ण जन्म व्रत 17 अगस्त को करेंगेंI इस बार रोहिणी नक्षत्र का भी क्षय है I जब कोई नक्षत्र सूर्योदय के बाद प्रारंभ हो तथा दूसरे दिन सूर्योदय के पूर्व समाप्त हो जाए, उसे क्षय नक्षत्र कहा जाता हैI रोहिणी नक्षत्र 17 अगस्त को प्रातः 6 :29 बजे लग रहा है जो 18 अगस्त को भोर में 4:54 बजे तक रहेगाI ऐसे में उदयकाल में रोहिणी नक्षत्र भी नहीं मिल रहा हैI भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव जन्माष्टमी पर्व इस बार शनिवार 16 अगस्त को मनाया जाएगाI ख़ास यह कि इस बार वैष्णव व स्मार्तजन रोहिणी नक्षत्र में एक साथ प्रभु का जन्मोत्स्व मनाएंगेI केवल औदायिक रोहिणी नक्षत्र मतावलंबी अगले दिन 17 अगस्त को जन्माष्टमी का पर्व मनाएंगे I
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